Ek dil ki shayeri - Best Poetry

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एक दिल की शायरी
Hum Khak Hain Aur Khak Hi Mawa Hain  Hamara,  Khaki To Wo Aadam Jadde Aala Hain Hamara
मां  क्या  गई  कि साथ में बरकत चली गई  दिल  का  सुकून  रूह  की  राहत चली गई
जितनी है एक क्लर्क की तनख्वाह आज कल उतना है बेगम के एक साल का बजट
मैं रहूंगा न मेरा अक्स ही कहीं होगा यूं तेरे सामने होने को ज़माना होगा।
गीतों के संग तुन-तुन बजता हम इकतारा भूल गये हैं।    जीवन का संगीत सुनाता वह बनजारा भूल गये हैं।
नमाज़ें कर रहे हैं हम क़ज़ा ऐसे नहीं होता  भुला बैठे हैं हम अपना ख़ुदा ऐसे नहीं होता
फ़ासले  'सारे  'मिटा  'देती है पल में गूगल।  सैर  दुनिया  की  करा देती है पल में गूगल।
इ़बादत हो रही है ऑन लाइन।  मुह़ब्बत हो रही है ऑन लाइन।
मैं फ़र्द हूँ एक आम सा एक क़िस्सा-ए-ना तमाम सा,
ऐ बाईस, कब से हम, तेरी राह में मुंतजिर थे,  तुम आये हो, इस तरह कि, भनक नहीं लगी ।
दिन भर की गर्दिश से थक कर लौट गया। शाम  हुई   तो  सूरज  भी  घर  लौट गया।
मुश्किलों का सामना गर करेगा ही नहीं तू जीतेगा कैसे जब लड़ेगा ही नहीं
इस कोरोनावायरस की महामारी पर एक बेहतरीन ग़ज़ल।।
चर्चा  हमारा  इन दिनों  है  आम  दुनिया  में।  हम भी नहीं कम  आपसे  बदनाम दुनिया में।
जाते हो तो जाओ अब लौट कर मत आना।  लौट कर जब आओ तो मेरे घर मत आना।
हम मुसाफिरों का कहाँ पुख़्ता ठिकाना होता है  शाम  जहाँ  ढल  जाये  वहीं अशियाना होता है
रात -सा चुपचाप खोया खोया सा भी है   रंज ओ ग़म में ख़ूब मुब्तला है आदमी
आयशा के दिल का दर्द:-
बस्तियों को लूटने में शक न हो  चोर चौकीदार  लेके आ गए।
माना, के वो भी आजतक, माना तो है नहीं  हमने भी उसके  शहर  से,  जाना तो है नहीं