Ek dil ki shayeri - Best Poetry

Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

एक दिल की शायरी
Showing posts with the label मोहब्बत शायरीShow all
मां  क्या  गई  कि साथ में बरकत चली गई  दिल  का  सुकून  रूह  की  राहत चली गई
मुश्किलों का सामना गर करेगा ही नहीं तू जीतेगा कैसे जब लड़ेगा ही नहीं
चर्चा  हमारा  इन दिनों  है  आम  दुनिया  में।  हम भी नहीं कम  आपसे  बदनाम दुनिया में।
जाते हो तो जाओ अब लौट कर मत आना।  लौट कर जब आओ तो मेरे घर मत आना।
रात -सा चुपचाप खोया खोया सा भी है   रंज ओ ग़म में ख़ूब मुब्तला है आदमी
माना, के वो भी आजतक, माना तो है नहीं  हमने भी उसके  शहर  से,  जाना तो है नहीं
नज़दीक दिल के आज भी इक दिलरुबा लगे, यह दिल उसी  के  प्यार  में  अब  बाबरा  लगे।
अब तक यही सुना था के बाजार बिक गए  उस की गली गए तो खरीददार बिक गए
सुकूत ए मर्ग से डर कर शहर हमने बदल डाला। परिन्दें जब लगे मरने शजर हमने  बदल  डाला॥
शज़र चुपचाप से, मायूस से, तन्हा नज़र आये।  परिंदे घोसलों से उड़  गये जब  उनके पर आये।।
कांटों से मुहब्बत का इनआ'म भी देखा है।  फूलों से उलझने का अंजाम भी देखा है॥
दहर में वह गुल गुलज़ार नज़र आते है,  जिन पे कुर्बान यह संसार नज़र आते हैं