Ek dil ki shayeri - Best Poetry

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एक दिल की शायरी
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मैं रहूंगा न मेरा अक्स ही कहीं होगा यूं तेरे सामने होने को ज़माना होगा।
गीतों के संग तुन-तुन बजता हम इकतारा भूल गये हैं।    जीवन का संगीत सुनाता वह बनजारा भूल गये हैं।
नमाज़ें कर रहे हैं हम क़ज़ा ऐसे नहीं होता  भुला बैठे हैं हम अपना ख़ुदा ऐसे नहीं होता
फ़ासले  'सारे  'मिटा  'देती है पल में गूगल।  सैर  दुनिया  की  करा देती है पल में गूगल।
इ़बादत हो रही है ऑन लाइन।  मुह़ब्बत हो रही है ऑन लाइन।
मैं फ़र्द हूँ एक आम सा एक क़िस्सा-ए-ना तमाम सा,
ऐ बाईस, कब से हम, तेरी राह में मुंतजिर थे,  तुम आये हो, इस तरह कि, भनक नहीं लगी ।