Ek dil ki shayeri - Best Poetry

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एक दिल की शायरी
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जितनी है एक क्लर्क की तनख्वाह आज कल उतना है बेगम के एक साल का बजट
ऐ बाईस, कब से हम, तेरी राह में मुंतजिर थे,  तुम आये हो, इस तरह कि, भनक नहीं लगी ।
बस्तियों को लूटने में शक न हो  चोर चौकीदार  लेके आ गए।
मुझको डराना इतना आसान तो नहीं धनवान है तू कोई भगवान तो नहीं
सुकूत ए मर्ग से डर कर शहर हमने बदल डाला। परिन्दें जब लगे मरने शजर हमने  बदल  डाला॥
अंधभक्तों  और  चमचों  ने डुबाया  देश देखो,  देशहित  के नाम पर  बातें गरूरी  कर रहा है।
सालाना जश्न होंगे  नेताओं  के जन्मदिन पे  शहीद   चंद   दिनों   में   भुला  दिए  जायेंगे