आज का अखबार लेके आ गए।
झूठ का बाजार लेके आ गए।
बस्तियों को लूटने में शक न हो
चोर चौकीदार लेके आ गए।
उम्रभर गर्दन थी जिनके हाथ में
वो गुलाबी हार लेके आ गए
कस्तियों का इल्म जिनको ही न था
बिन कहे पतवार लेके आ गए।
चोर के हक में गवाही के लिए
चोर साहूकार लेके आ गए।
हाथ मे जिनके कभी चाकू न थी
कत्ल को तलवार लेके आ गए।
जीते जी देते रहे जो गालियाँ
मौत पर उपहार लेके आगये।
इश्क़ को बदनाम करने के लिए
जिस्म का व्यापार लेके आ गए।
भाइयों के बीच झगड़ा क्या हुआ
बीच घर दीवार लेके आ गए।
माँ को आता है सलीका गाँव का
शहर में बेकार ले के आ गए।
प्यासे प्रेमी के लबों में देखकर
जाम वो दो चार लेके आ गए।


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