बस्तियों को लूटने में शक न हो चोर चौकीदार लेके आ गए।

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एक दिल की शायरी

बस्तियों को लूटने में शक न हो चोर चौकीदार लेके आ गए।

 आज का अखबार लेके आ गए।

झूठ का बाजार लेके आ गए।


बस्तियों को लूटने में शक न हो

चोर चौकीदार  लेके आ गए।


उम्रभर गर्दन थी जिनके हाथ में

वो गुलाबी हार लेके आ गए


कस्तियों का इल्म जिनको ही न था

बिन कहे पतवार लेके आ गए।


चोर के हक में गवाही के लिए

चोर साहूकार लेके आ गए।


हाथ मे जिनके कभी चाकू न थी

कत्ल को तलवार लेके आ गए।


जीते जी देते रहे जो गालियाँ

मौत पर उपहार लेके आगये।


इश्क़ को बदनाम करने के लिए

जिस्म का व्यापार लेके आ गए।


भाइयों के बीच झगड़ा क्या हुआ

बीच घर दीवार लेके आ गए।


माँ को आता है सलीका गाँव का

शहर में बेकार ले के आ गए।


प्यासे प्रेमी के लबों में देखकर

जाम वो दो चार लेके आ गए।


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शायरी की दुनिया





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