आदाब, कई बार ऐसा होता है कि शाइरी करना चाहें तो शे'र नहीं होते और कई बार ख़यालों में खो जाने पर ख़ुदा पूरी ग़ज़ल अ़ता कर देता है। मेहरबान मां को…
Read moreकैसा अजीब आया है इस साल का बजट मुर्गी का जो बजट है वही दाल का बजट जितनी है एक क्लर्क की तनख्वाह आज कल उतना है बेग़मात के एक गाल का बजट टीवी का ये …
Read moreक्या पता लौट के आना के न आना होगा मेरे हमदम मुझे फ़िलहाल तो जाना होगा मैं रहूंगा न मेरा अक्स ही कहीं होगा यूं तेरे स…
Read moreहम कुछ बातें भूल गये हैं..... गीतों के संग तुन-तुन बजता हम इकतारा भूल गये हैं। जीवन का संगीत सुनाता वह बनजारा भूल गये हैं। छोटे थैले में भर …
Read moreनमाज़ें कर रहे हैं हम क़ज़ा ऐसे नहीं होता भुला बैठे हैं हम अपना ख़ुदा ऐसे नहीं होता नहीं कुछ ख़ौफ़ महशर का न जन्नत की तमन्ना है चढ़ा है सिर्फ दौलत का न…
Read moreग़ज़ल फ़ासले 'सारे 'मिटा 'देती है पल में गूगल। सैर दुनिया की करा देती है पल में गूगल। आप आओ तो सही इस 'पे ह़ुज़ूरे वाला। जो …
Read moreग़ज़ल इ़बादत हो रही है ऑन लाइन। मुह़ब्बत हो रही है ऑन लाइन। कई चैनल हैं जिनपर देखिए तो। …
Read moreमैं फ़र्द हूँ एक आम सा मैं फ़र्द हूँ एक आम सा एक क़िस्सा-ए-ना तमाम सा, ना लहजा बेमिसाल है …
Read moreवर्षांतरण : 2021-22 साल ठीक गुजर गया, खबर नहीं लगी, बचे रहे कि किसी की, नज़र नहीं लगी । बहुत सी गुगलियां थी, इसके तरकश में, अच्छा हुआ खेलने की, तलब़…
Read moreदिन भर की गर्दिश से थक कर लौट गया। शाम हुई तो सूरज भी घर लौट गया। चाँदी सी इक रात जमीं पर जब उतरी, एक सुनहरे दिन का मंज़र लौट गया।…
Read moreमुश्किलों का सामना गर करेगा ही नहीं तू जीतेगा कैसे जब लड़ेगा ही नहीं गलतीयां उनसे होती हैं जो कर्म करते हैं वो क्या ग…
Read moreआप क्यों हैरान हैं, जो मर गए सो मर गए। कौन सा भगवान हैं, जो मर गए सो मर गए।1। देश में फैला ज़हर , परदेस में चल जाइये। आपका सम्मान है…
Read moreचर्चा हमारा इन दिनों है आम दुनिया में। हम भी नहीं कम आपसे बदनाम दुनिया में। वो ज़िन्दगी भी क्या है कोई ज़िन्दगी यारों। जिसमें न आये सर कोई …
Read moreझुका कर सर मत आना जाते हो तो जाओ अब लौट कर मत आना। लौट कर जब आओ तो मेरे घर मत आना। नींद बहुत बाक़ी है इंतेज़ार के वक़्त की। ख्वाबों में भी आओ तो अक्…
Read moreहम मुसाफिरों का कहाँ पुख़्ता ठिकाना होता है शाम जहाँ ढल जाये वहीं अशियाना होता है कैसा अजीब मर्ज है यह दर्द ए मुहब्बत भी मीठा लगने लगता…
Read moreआज चारदीवारी में कैद है आदमी ख़ूब अपने आप में फँस गया है आदमी रात -सा चुपचाप खोया खोया सा भी है रंज ओ ग़म में ख़ूब मुब्तला है आदमी शताब्दी …
Read moreआयशा के दिल का दर्द:- कितना रोती थी रात भर पापा। अपनी ग़ुर्बत को कोस कर पापा। ज़िन्दगी नर्क बन गई थी मेरी। छोड़ आई पिया का घर पापा। कितना दा…
Read moreआज का अखबार लेके आ गए। झूठ का बाजार लेके आ गए। बस्तियों को लूटने में शक न हो चोर चौकीदार लेके आ गए। उम्रभर गर्दन थी जिनके हाथ में वो गुलाबी हार लेक…
Read moreमाना, के वो भी आजतक, माना तो है नहीं हमने भी उसके शहर से, जाना तो है नहीं रक्खी है कू-ए-यार की, मिट्टी संभाल के इससे बड़ा ज़मीन पे, खज़ाना तो है न…
Read moreग़ज़ल नज़दीक दिल के आज भी इक दिलरुबा लगे यह दिल उसी के प्यार में अब बाबरा लगे देखूँ मैं जब भी उसको तो होता यही गुमां पिछले जनम का उससे क…
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