नज़दीक दिल के आज भी इक दिलरुबा लगे, यह दिल उसी के प्यार में अब बाबरा लगे।

Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

एक दिल की शायरी

नज़दीक दिल के आज भी इक दिलरुबा लगे, यह दिल उसी के प्यार में अब बाबरा लगे।

 ग़ज़ल


नज़दीक दिल के आज भी इक दिलरुबा लगे

यह दिल उसी  के  प्यार  में  अब  बाबरा  लगे 


देखूँ  मैं  जब  भी  उसको  तो  होता यही गुमां

पिछले जनम का  उससे कोई सिलसिला लगे


इस दिल के आइने में ज़रा झाँक क्या लिया 

 वो  हूबहू  ही  मुझको  तो  महबूब  सा  लगे


जी  चाहता  है  रोज़  करूँ  उससे  गुफ्तगू

बीमारे-ग़म को उसकी ही क़ुर्बत  दवा लगे 


उसकी किसी भी बात को यूँ टालता नहीं 

हर  हुक़्म में कहीं न  कहीं  इल्तिजा  लगे


दीवारो-दर पे उसकी ही तस्वीरें क़ैद हैं

यादों की कोठरी में यक़ीनन मज़ा लगे 


वो  बेवफ़ा  है  लाख  मगर  मेरा  प्यार  है 

अफशा न उसको मेरी कभी  बद्दुआ  लगे

ग़ज़ल-2020


Post a Comment

0 Comments