ग़ज़ल
फ़ासले 'सारे 'मिटा 'देती है पल में गूगल।
सैर दुनिया की करा देती है पल में गूगल।
आप आओ तो सही इस 'पे ह़ुज़ूरे वाला।
जो 'न देखा हो दिखा देती है पल में गूगल।
मस्तो सरशार ये कर देती है ख़ुद में इतना।
वास्ता सबसे 'घटा देती है पल में गूगल।
जो ये कहते हैं नहीं नींद से बेहतर कुछ'भी।
नींद उनकी भी 'उड़ा देती है पल में गूगल।
बेहुनर 'को भी 'सिखाकर ये हुनर की बातें।
कारीगर सबको 'बना देती है पल में गूगल।
कोई पकवान बनाना हो तो आओ इस पर।
रेसिपी सब की सिखा देती है पल में गूगल।
राहे मन्ज़िल से भटक जाते हैं राही जो'भी।
राह उनको भी बता देती है पल में गूगल।
सर्च 'जिसने भी किया इसको उसे'तो यारो।
खाना -पीना भी भुला देती है पल में गूगल।
ये'करिश्मा भी अफशा' इसका अयाँ हैं हरसू।
पर्दा हर शय ' से हटा देती है पल में गूगल।

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