मुश्किलों का सामना गर करेगा ही नहीं
तू जीतेगा कैसे जब लड़ेगा ही नहीं
गलतीयां उनसे होती हैं जो कर्म करते हैं
वो क्या ग़लती करेगा जो कुछ करेगा ही नहीं
परखोगे जब ज़माने को सब भरम टूट जायेंगे
उम्मीद पे ख़रा कोई उतरेगा ही नहीं
बड़ा नाज़ुक होता है ऐतबार का धागा
टूट जाए इक बार तो जुड़ेगा ही नहीं
ठान ले दिल में सज़ा देने की जो काज़ी*
वो आप की दलीलें फिर सुनेगा ही नहीं
सही लुत्फ़ चाहिए जिसे मंज़िल को पाने का
वो आसान रास्ते कभी चुनेगा ही नहीं
हैरां हूं देख के मैं तो आदमी के रंग ढंग
इस तरह जी रहा है जैसे मरेगा ही नहीं
कैसे आए दम शायरी में और जान लफ़्ज़ों में
ज़िन्दगी के रंग शायर गर भरेगा ही नहीं
आज़माना है मुझको तो जान मांग के देखिए
इस छोटी बात पे " राज " अड़ेगा ही नहीं
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