रूखसत हुआ तो आंख मिलाकर नहीं गया, वह क्यों गया है यह भी बता कर नहीं गया।

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एक दिल की शायरी

रूखसत हुआ तो आंख मिलाकर नहीं गया, वह क्यों गया है यह भी बता कर नहीं गया।

आपको सभी तरह की शायरी, उर्दू - हिंदी  भाषा में मिलेगा. नाथ शरीफ़, ग़ज़ल, मनकबत, हमद, और कई तरह की शायरी

शायरी, कविता का एक ऐसा रूप है जो हमारी भावनाओं को दूसरों तक तक पहुंचने में मदद करता है।

कई बार हम अपनी दर्द को किसी  से बयां करने में सक्षम नहीं रहते और उस हालत में हम अपनी दर्द को शायरी के दरमियान दूसरों तक पहुंचाते हैं।

अगर आप शायरी, ग़ज़ल मनकबत हमद नाआत पढ़ने में दिलचस्प रखते हैं तो आप सही जगह पर आएं हैं।



 रुखसत हुआ तो आंख मिलाकर नहीं गया.!

वह क्यों गया है यह भी बता कर नहीं गया..!!


वह  यों  गया  के  बाद  सबा  याद  आ  गई

एहसास तक भी हमको दिया कर नहीं गया.।

यूं  लग  रहा  है  जैसे  अभी  लौट  आएगा

जाते   हुए   चिराग  बुझा  कर  नहीं  गया।


बस एक लकीर खींच गया दरमियान में।

दीवार   रास्ते   में   बनाकर   नहीं  गया।


शायद वह मिल ही जाए मगर जुस्तजू है शर्त

वह अपने नक्शे पा तो मिटा कर नहीं गया।


घर में है आजतक वहीं खुशबू बसी हुई

लगता है यों के जैसे वह आकर नहीं गया।


तब-तक तो फुल जैसी ही ताजा थी उसकी याद

जबतक वह पत्तीयों को जुदा कर नहीं गया।


रहने दिया ना उसने किसी काम का मुझे

और ख़ाक में भी मुझको मिलाकर चले गया।

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