कहूं कैसे कि मुझको गम नहीं है, मगर यह आंख फिर भी नम नहीं है

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एक दिल की शायरी

कहूं कैसे कि मुझको गम नहीं है, मगर यह आंख फिर भी नम नहीं है

आपको सभी तरह की शायरी, उर्दू - हिंदी  भाषा में मिलेगा. नाथ शरीफ़, ग़ज़ल, मनकबत, हमद, और कई तरह की शायरी

शायरी, कविता का एक ऐसा रूप है जो हमारी भावनाओं को दूसरों तक तक पहुंचने में मदद करता है।

कई बार हम अपनी दर्द को किसी  से बयां करने में सक्षम नहीं रहते और उस हालत में हम अपनी दर्द को शायरी के दरमियान दूसरों तक पहुंचाते हैं।

अगर आप शायरी, ग़ज़ल मनकबत हमद नाआत पढ़ने में दिलचस्प रखते हैं तो आप सही जगह पर आएं हैं।



कहूं  कैसे  कि  मुझको  गम नहीं है.!

मगर यह आंख फिर भी नम नहीं है..!!


तेरी  राहों में पलकों को बिछाया.!

यह कुर्बानी भी कोई कम नहीं है..!!




अभी तक प्यार के आलम में दिल है.!

 मगर  पहला  वह   आलम   नहीं  है..!!

वफाओं  पर मेरी शक़ करने वालों.!

दलीलों में कभी तुम्हारे दम नहीं है..!!



मुझे झुठा दिलासा  दिलाने वाले.!

यह मेरी जख्म का मरहम नहीं है..!!


इसमें जाना मुझे अल्लाह रखें.!

मेरा प्यार फिर भी कम नहीं है..!!

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